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सौप्तिक पर्व
अध्याय १६
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वैशम्पाय़न उवाच
विराटस्य सुतां पूर्वं स्नुषां गाण्डीवधन्वनः |  २   क
उपप्लव्यगतां दृष्ट्वा व्रतवान्व्राह्मणोऽव्रवीत् ||  २   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति