वन पर्व  अध्याय ९२

लोमश उवाच

तानलज्जान्गतह्रीकान्हीनवृत्तान्वृथाव्रतान् |  ९   क
क्षमा लक्ष्मीश्च धर्मश्च नचिरात्प्रजहुस्ततः |  ९   ख
लक्ष्मीस्तु देवानगमदलक्ष्मीरसुरान्नृप ||  ९   ग
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति