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कर्ण पर्व
अध्याय ३३
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सञ्जय़ उवाच
विप्रविद्धाय़ुधाङ्गाश्च द्विरदाश्वरथैर्हताः |  ५३   क
प्रतिवीरैश्च संमर्दे पत्तिसङ्घाः सहस्रशः ||  ५३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति