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उद्योग पर्व
अध्याय ८०
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वैशम्पाय़न उवाच
जीवत्सु कौरवेय़ेषु पाञ्चालेष्वथ वृष्णिषु |  २५   क
दासीभूतास्मि पापानां सभामध्ये व्यवस्थिता ||  २५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति