उद्योग पर्व  अध्याय ८०

वैशम्पाय़न उवाच

एवंविधानां दुःखानामभिज्ञोऽसि जनार्दन |  २९   क
त्राहि मां पुण्डरीकाक्ष सभर्तृज्ञातिवान्धवाम् ||  २९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति