उद्योग पर्व  अध्याय ८०

वैशम्पाय़न उवाच

त्रय़ोदश हि वर्षाणि प्रतीक्षन्त्या गतानि मे |  ४०   क
निधाय़ हृदय़े मन्युं प्रदीप्तमिव पावकम् ||  ४०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति