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शल्य पर्व
अध्याय ३६
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वैशम्पाय़न उवाच
एवं ख्यातो नरपते लोकेऽस्मिन्स वनस्पतिः |  २४   क
तत्र तीर्थं सरस्वत्याः पावनं लोकविश्रुतम् ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति