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भीष्म पर्व
अध्याय ८०
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सञ्जय़ उवाच
विरथं चैनमालोक्य हताश्वं हतसारथिम् |  ३६   क
महता शरवर्षेण छादय़ामास संय़ुगे ||  ३६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति