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भीष्म पर्व
अध्याय ८०
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सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तः स वार्ष्णेय़ः कौन्तेय़ेनामितौजसा |  ४४   क
रथं श्वेतहय़ैर्युक्तं प्रेषय़ामास संय़ुगे ||  ४४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति