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द्रोण पर्व
अध्याय ९
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वैशम्पाय़न उवाच
विराटस्य रथानीकं मत्स्यस्यामित्रघातिनः |  ६७   क
प्रेप्सन्तं समरे द्रोणं के वीराः पर्यवारय़न् ||  ६७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति