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शल्य पर्व
अध्याय ९
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सञ्जय़ उवाच
हय़ांश्चास्य शरैस्तीक्ष्णैः प्रेषय़ामास मृत्यवे |  १४   क
तथा ध्वजं सारथिं च त्रिभिस्त्रिभिरपातय़त् ||  १४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति