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विराट पर्व
अध्याय ६७
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वैशम्पाय़न उवाच
इन्द्रसेनादय़श्चैव रथैस्तैः सुसमाहितैः |  २२   क
आय़युः सहिताः सर्वे परिसंवत्सरोषिताः ||  २२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति