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शल्य पर्व
अध्याय ६२
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वैशम्पाय़न उवाच
कुलं वंशश्च पिण्डश्च यच्च पुत्रकृतं फलम् |  ४९   क
गान्धार्यास्तव चैवाद्य पाण्डवेषु प्रतिष्ठितम् ||  ४९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति