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शान्ति पर्व
अध्याय ३२७
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वैशम्पाय़न उवाच
प्रदिशस्व वलं तस्य योऽधिकारार्थचिन्तकः |  ३५   क
एवमुक्तो महादेवो देवांस्तानिदमव्रवीत् ||  ३५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति