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शान्ति पर्व
अध्याय ८१
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भीष्म उवाच
धर्मात्मा पञ्चमं मित्रं स तु नैकस्य न द्वय़ोः |  ४   क
यतो धर्मस्ततो वा स्यान्मध्यस्थो वा ततो भवेत् ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति