अनुशासन पर्व  अध्याय ८१

श्रीरु उवाच

क्षममेतद्धि वो गावः प्रतिगृह्णीत मामिह |  १५   क
नावमन्या ह्यहं सौम्यास्त्रैलोक्ये सचराचरे ||  १५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति