अनुशासन पर्व  अध्याय ८१

गाव ऊचुः

नावमन्यामहे देवि न त्वां परिभवामहे |  १६   क
अध्रुवा चलचित्तासि ततस्त्वां वर्जय़ामहे ||  १६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति