अनुशासन पर्व  अध्याय १२८

उमो उवाच

भगवन्संशय़ो मेऽत्र तं मे व्याख्यातुमर्हसि |  ३४   क
चातुर्वर्ण्यस्य धर्मं हि नैपुण्येन प्रकीर्तय़ ||  ३४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति