menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय ८१
chevron_left
chevron_right
पुलस्त्य उवाच
आपगाय़ां नरः स्नात्वा अर्चय़ित्वा महेश्वरम् |  १५४   क
गाणपत्यमवाप्नोति कुलं चोद्धरते स्वकम् ||  १५४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति