आश्वमेधिक पर्व  अध्याय ८१

वैशम्पाय़न उवाच

जानाम्यहमिदं युद्धं त्वय़ा मद्वचनात्कृतम् |  २०   क
स्त्रीणामागमने हेतुमहमिच्छामि वेदितुम् ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति