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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५९
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वासुदेव उवाच
अकरोत्स ततः कालं शरतल्पगतो मुनिः |  १२   क
अय़नं दक्षिणं हित्वा सम्प्राप्ते चोत्तराय़णे ||  १२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति