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वन पर्व
अध्याय ८१
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पुलस्त्य उवाच
सर्वस्त्वमसि लोकानां कर्ता कारय़िता च ह |  १११   क
त्वत्प्रसादात्सुराः सर्वे मोदन्तीहाकुतोभय़ाः |  १११   ख
एवं स्तुत्वा महादेवं स ऋषिः प्रणतोऽभवत् ||  १११   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति