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वन पर्व
अध्याय ८१
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पुलस्त्य उवाच
शालिहोत्रस्य राजेन्द्र शालिशूर्पे यथाविधि |  ९०   क
स्नात्वा नरवरश्रेष्ठ गोसहस्रफलं लभेत् ||  ९०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति