वन पर्व  अध्याय ८१

पुलस्त्य उवाच

विमोचनमुपस्पृश्य जितमन्युर्जितेन्द्रिय़ः |  १४०   क
प्रतिग्रहकृतैर्दोषैः सर्वैः स परिमुच्यते ||  १४०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति