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वन पर्व
अध्याय ८१
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पुलस्त्य उवाच
तत्र व्रह्मा स्वय़ं नित्यं देवैः सह महीपते |  १४७   क
अन्वास्यते नरश्रेष्ठ नाराय़णपुरोगमैः ||  १४७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति