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वन पर्व
अध्याय ८१
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पुलस्त्य उवाच
पृथिव्यां यानि तीर्थानि अन्तरिक्षचराणि च |  १६८   क
नद्यो नदास्तडागाश्च सर्वप्रस्रवणानि च ||  १६८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति