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वन पर्व
अध्याय ८१
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पुलस्त्य उवाच
पृथिव्यां नैमिषं पुण्यमन्तरिक्षे च पुष्करम् |  १७३   क
त्रय़ाणामपि लोकानां कुरुक्षेत्रं विशिष्यते ||  १७३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति