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वन पर्व
अध्याय २६६
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मार्कण्डेय़ उवाच
कः स रामः कथं सीता जटाय़ुश्च कथं हतः |  ५२   क
इच्छामि सर्वमेवैतच्छ्रोतुं प्लवगसत्तमाः ||  ५२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति