वन पर्व  अध्याय ८१

पुलस्त्य उवाच

वंशमूलकमासाद्य तीर्थसेवी कुरूद्वह |  ३४   क
स्ववंशमुद्धरेद्राजन्स्नात्वा वै वंशमूलके ||  ३४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति