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वन पर्व
अध्याय ८१
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पुलस्त्य उवाच
शुक्लपक्षे दशम्यां तु पुण्डरीकं समाविशेत् |  ६९   क
तत्र स्नात्वा नरो राजन्पुण्डरीकफलं लभेत् ||  ६९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति