वन पर्व  अध्याय ८१

पुलस्त्य उवाच

ततो गच्छेत राजेन्द्र मिश्रकं तीर्थमुत्तमम् |  ७६   क
तत्र तीर्थानि राजेन्द्र मिश्रितानि महात्मना ||  ७६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति