उद्योग पर्व  अध्याय ८१

वैशम्पाय़न उवाच

व्रह्मदेवर्षय़श्चैव कृष्णं यदुसुखावहम् |  २८   क
प्रदक्षिणमवर्तन्त सहिता वासवानुजम् ||  २८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति