उद्योग पर्व  अध्याय ८१

वैशम्पाय़न उवाच

अथापश्यन्महावाहुरृषीनध्वनि केशवः |  ६०   क
व्राह्म्या श्रिय़ा दीप्यमानान्स्थितानुभय़तः पथि ||  ६०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति