उद्योग पर्व  अध्याय ८१

वैशम्पाय़न उवाच

आपृष्टोऽसि महावाहो पुनर्द्रक्ष्यामहे वय़म् |  ७२   क
याह्यविघ्नेन वै वीर द्रक्ष्यामस्त्वां सभागतम् ||  ७२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति