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भीष्म पर्व
अध्याय ८१
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सञ्जय़ उवाच
स धर्मराजस्य वचो निशम्य; रूक्षाक्षरं विप्रलापानुवद्धम् |  २४   क
प्रत्यादेशं मन्यमानो महात्मा; प्रतत्वरे भीष्मवधाय़ राजन् ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति