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भीष्म पर्व
अध्याय ८१
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सञ्जय़ उवाच
तमापतन्तं महता जवेन; शिखण्डिनं भीष्ममभिद्रवन्तम् |  २५   क
आवारय़ामास हि शल्य एनं; शस्त्रेण घोरेण सुदुर्जय़ेन ||  २५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति