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भीष्म पर्व
अध्याय ८१
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सञ्जय़ उवाच
विहाय़ सर्वे तव पुत्रमुग्रं; पातं गदाय़ाः परिहर्तुकामाः |  ३४   क
अपक्रान्तास्तुमुले संविमर्दे; सुदारुणे भारत मोहनीय़े ||  ३४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति