द्रोण पर्व  अध्याय ८१

सञ्जय़ उवाच

ताञ्शरान्द्रोणमुक्तांस्तु शरवर्षेण पाण्डवः |  २१   क
अवारय़त धर्मात्मा दर्शय़न्पाणिलाघवम् ||  २१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति