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द्रोण पर्व
अध्याय ८१
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सञ्जय़ उवाच
शक्तिं समुद्यतां दृष्ट्वा धर्मराजेन संय़ुगे |  ३०   क
स्वस्ति द्रोणाय़ सहसा सर्वभूतान्यथाव्रुवन् ||  ३०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति