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द्रोण पर्व
अध्याय ८१
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सञ्जय़ उवाच
सर्वे द्रोणरथं प्राप्य पाञ्चालाः पण्डवैः सह |  ५   क
तदनीकं विभित्सन्तो महास्त्राणि व्यदर्शय़न् ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति