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आदि पर्व
अध्याय ८२
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शक्र उवाच
यदा स पूरुस्तव रूपेण राज; ञ्जरां गृहीत्वा प्रचचार भूमौ |  ४   क
तदा राज्यं सम्प्रदाय़ैव तस्मै; त्वय़ा किमुक्तः कथय़ेह सत्यम् ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति