शान्ति पर्व  अध्याय ८२

नारद उवाच

अनाय़सेन शस्त्रेण मृदुना हृदय़च्छिदा |  १९   क
जिह्वामुद्धर सर्वेषां परिमृज्यानुमृज्य च ||  १९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति