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शान्ति पर्व
अध्याय ८२
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नारद उवाच
सर्व एव गुरुं भारमनड्वान्वहते समे |  २४   क
दुर्गे प्रतीकः सुगवो भारं वहति दुर्वहम् ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति