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शान्ति पर्व
अध्याय ८२
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नारद उवाच
उपासते हि त्वद्वुद्धिमृषय़श्चापि माधव |  ३०   क
त्वं गुरुः सर्वभूतानां जानीषे त्वं गतागतम् |  ३०   ख
त्वामासाद्य यदुश्रेष्ठमेधन्ते ज्ञातिनः सुखम् ||  ३०   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति