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उद्योग पर्व
अध्याय ९५
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वैशम्पाय़न उवाच
देवमानुषलोकौ द्वौ मानसेनैव चक्षुषा |  १७   क
अवगाह्यैव विचितौ न च मे रोचते वरः ||  १७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति