शान्ति पर्व  अध्याय ८२

वासुदेव उवाच

अन्ये हि सुमहाभागा वलवन्तो दुरासदाः |  ८   क
नित्योत्थानेन सम्पन्ना नारदान्धकवृष्णय़ः ||  ८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति