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अनुशासन पर्व
अध्याय ८२
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भीष्म उवाच
मुनींश्च धारय़न्तीह प्रजाश्चैवापि कर्मणा |  २०   क
वासवाकूटवाहिन्यः कर्मणा सुकृतेन च |  २०   ख
उपरिष्टात्ततोऽस्माकं वसन्त्येताः सदैव हि ||  २०   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति