अनुशासन पर्व  अध्याय ८२

व्रह्मो उवाच

तामेवं व्रुवतीं देवीं सुरभीं त्रिदशेश्वर |  ३३   क
प्रत्यव्रुवं यद्देवेन्द्र तन्निवोध शचीपते ||  ३३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति