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अनुशासन पर्व
अध्याय ८२
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व्रह्मो उवाच
तस्या लोकाः सहस्राक्ष सर्वकामसमन्विताः |  ३८   क
न तत्र क्रमते मृत्युर्न जरा न च पावकः |  ३८   ख
न दैन्यं नाशुभं किञ्चिद्विद्यते तत्र वासव ||  ३८   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति