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वन पर्व
अध्याय २४०
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वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनं निशान्ते च कर्णो वैकर्तनोऽव्रवीत् |  ३५   क
स्मय़न्निवाञ्जलिं कृत्वा पार्थिवं हेतुमद्वचः ||  ३५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति